श्रद्धा और सब्र के साथ हो रही है धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और नगर कीर्तन के आगमन की प्रतीक्षा। बोले सो निहाल, सत् श्री अकाल!”
श्रद्धा और सब्र के साथ हो रही है धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और नगर कीर्तन के आगमन की प्रतीक्षा। बोले सो निहाल, सत् श्री अकाल!”